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December 23, 2014

लकड़ी की नाव है

है खपचियों की पतवार

हौसला भी कर लूंगा
पानी में तो बहाव हो
जंगल पार कर आया हूँ
दरया मुहाने हूँ बैठा
भटकूँ की लुढ़क जाऊँ
कोई जायज़ चुनाव हो
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किसी और दुनिया में ले चलो मुझको
यहाँ पर खून बहुत है
हरा, पीला, बदामी, नीला
ऐसा कोई रंग दिखाओ मुझको
यहाँ पर खून बहुत है

मारूं की मर जाऊँ
बहाऊँ की बह जाऊँ
कोई दूसरा रास्ता बताओ मुझको
की इसपर खून बहुत है

नस में छुप कर जो बहता है
उसकी दुनिया प्यासी क्यूँ
की ब्लड बॅंक वालों को बुलाओ
यहाँ पर खून बहुत है

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