Archive for June, 2014

June 16, 2014

मेरी मंज़िल क्या थी मेरी जुस्तज़ू क्या थी

अब ये तलक़ याद नहीं मेरी आरज़ू क्या थी
 
कल आया था जो दरवाज़े पे पसरा था बड़ी देर
चेहरा तो याद है कुछ पर रंगत याद नहीं
 

लिखने लायक शब्द नहीं, अल्फाज़ नहीं, कोई बात नहीं
है बात कोई बड़ी नहीं वही पुरानी घिसी पिटी कहानी
सुनी नहीं होगी तुमने शायद पर जी तो होगी तुमने भी
बात वोही जो कहते कहते खो जाती है, शब्दों की नमी उड जाती है,
दिल की गफलत दिमाग की नसौं में गर्मी बनकर उतर जाती है
तुम गलत नहीं, मैं सही नहीं,