Archive for April, 2013

April 13, 2013

ऐ ज़िन्दगी तू है बड़ी ही कुत्ती चीज़
मेरी वाट लगा कर रक्खी है
दो लोटे पानी में एक लोटा तेल मिलाकर
तूने सब खिचड़ी बना दिया है
और तेरी ये खिचड़ी खा खाकर
मेरा पेट ख़राब हो गया है

कभी देसी स्टाइल में हगता हूँ
तो कभी विदेशी पखाना ट्राई करता हूँ
करूँ चाहे जिधर पर ज्यादातर बस हगता ही रहता हूँ
अब थोड़े दिन की माफ़ी दे दे
मेरे पेट में दर्द हो गया है भाई
अब और हग नहीं जाता
वैसे तो लम्बे दिनों के लिए छुट्टी मांगता
पर उतना करना तो तेरी हैसियत में है नहीं
तू ठहरी साली बड़ी ही कुत्ती चीज़
चल फुटबाल मैच का इंटरवल समझ कर ब्रेक दे दे
ठीक है भाई, जल्दी कर, मैं चलता हूँ
कहाँ? वहीँ जहाँ तू कई दिनों से मिनट मिनट पे भेज रही है
डब्बा किधर है? भाई जल्दी दो निकल जायेगी।

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