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December 22, 2012

ले चलो मुझको दूर इन दुनिया के उजालों से
बंद कर के रखो मुझे किन्हीं अँधेरे गलियारों में
जहाँ तन्हाई हो, उदासी हो, एक ठहरा सा आलम हो
जब भी हो आँख गीली, पोंछने को एक टुकड़ा-ए-ग़म हो

यहाँ शोर बहुत है, लोग चिल्लाते बहुत हैं
भरसक नींद नहीं आती, जागते रहो की आवाज़ लोग लगाते बहुत हैं
मुझे अपने साथ रहना है कोई दूसरा नहीं चहिये
सब कुछ बिखरा रखना है, आबाद नहीं चहिये

क्या तुम बनोगे मेरे साथी और मेरे साथ चलोगे
हम इक शहर बनायेंगे अजनबी दोस्तों का
सबके पास होगी एक गठरी उनकी अपनी
दुबकी रहेगी वो कोने में झोपड़ी के
और हम मिलेंगे बाहर मैदानों में
खामोश से चलेंगे हम सड़कों पे
कोई आवाज़ नहीं होगी, कोई बात न करेगा
एक दूजे से टकरा जायें तो कोई न कुछ कहेगा
यूँ रहेंगे साथ जैसे हम अकेले हों
यूँ करेंगे बात जैसे कोई अनहोनी बात बोली हो
मैं अपनी कहूँगा, तुम अपनी कहोगे
हो किसी की भी कहानी, हम सबमें अपनी सुनेंगे
हमें बस अपना ध्यान होगा, हम बस अपनी सुनेंगे
होगा न कोई हमारे दिलों में और हम सबके दिलों में रहेंगे
होकर दर्द से खाली, बनेंगे हम खुद से बेखुद बवाली
रंज भी होगा, ग़म भी होगा हमारे पास
हमें आम रहना है नहीं चहिये कोई ख़ास
हम शोर करेंगे, हम हुंकार भरेंगे
बिना बात के यूँ ही हम तकरार करेंगे
हम खुद को नोचेंगे, हम चेहरे पे निशाँ खींच लेंगे
की अपनी किसी भी हस्ती को हम पैरों से रौंद देंगे
न जायेगा कोई खाली हाथ हम भर भर के खून देंगे
जिधर भी गड्ढा दिखेगा हम छलांग मार लेंगे
की जमीन से उठ न पाएं हाथ पैर इतने तोड़ लेंगे
और फिर पड़े रहेंगे, चिल्लाते रहेंगे
आसमान फट पड़ेगा न जब तक, हम रोते रहेंगे
बारिशें भी होंगी, अंधड़ भी चलेंगे
पर हम न हिलेंगे हम पड़े रहेंगे
ज़ख्म जब हमारे सड़ के गलने लगेंगे
सूख कर पपड़ियाँ निशान बनने लगेंगे
हम सहलायेंगे उनको, जीभ से गिला करेंगे
एक आध दो को हम उधेड़ कर भी देखा करेंगे
रुला के आसमान को हम फिर घर को चलेंगे
बेदर्द है वो, बेरहम है
सबको मालूम है ये, पर अहसास करा के रहेंगे
पैर हिलने लगेंगे, घुटने गिरने लगेंगे
दर्द से न रोये पर इस बेरुखी पे हम रोने लगेंगे
और जाकर अपने घरों में बैठेंगे
उन कोनों में जहाँ राखी हैं वो बंधी पोटलियाँ
खोल कर उनको कभी देखा करेंगे
कभी लेट जायेंगे बिस्तरों पे और आसमान ताका करेंगे
वो ऊपर हम बिन प्यासा है और हम ज़मीं पर फांका करेंगे
उस दिन ख़ामोशी आएगी और बैठेगी हमारे पास
जो कोई कह न सका वो बतलाएगी वो बात ख़ास
अरे आसमान क्या है वो बस बादल का एक घर है
तुम्हारे साथ रहे कहाँ उसको इतनी फुर्सत है
और क्या सोचते हो, तुम्हें कहाँ उसकी ज़रूरत है
वो बारिश करता है, तुम हाथ फैला लो
पानी को उसके अपनी मुट्ठी में भींच लो
देखो झाँक के इसमें जो चाहे अक्स देख लो
और उठ कर खिड़की से हाथ निकल दिए
आसमान ने भी जैसे द्रवित होकर दो बूंद गिरा दिए
लेकर उनको हथेली पे मैं बैठा देखता रहा
आँखें की मैंने गीली उनसे और बहार निकल गया
आसमान रहा वहीँ और मैं उसके नीचे चलता चला गया
जाने कौन थे वो लोग कहाँ से आये थे
वो साथ आते गए और कारवां बनता चला गया
बड़ी दूर निकल गए हम, बड़ी देर चले हम
कुछ ज़ख्म भर गए, कुछ नासूर बन गए
कुछ ने चाल डगमगा दी, कुछ हौसला सिखा गए
बैठे हम होकर बोझिल एक चट्टान पर चौड़ी
पसरी हुयी थी चांदनी और हवा में नमी भी थी थोड़ी
सो गए हम उसपर करके पैर सीधे
नींद आ गयी, थकान चली गयी
बड़े दिनों से थमी थी जो दिल में, वो रात गुज़र गयी
सूरज उग चला था, धुप होने वाली थी
चिलचिला उठे थे हम जिसमें वो सुबह फिर से होने चली थी
पर अब उतनी थकान न थी, कोई दुबकी शिकायत परेशान न थी
हाँ ये और बात है की अभी भी चेहरे पे मुस्कान न थी
पर हमें मालूम था की फिर से शाम होनी है
की फिर दिन ढले कुछ बातों के साथ बादल से मुलाक़ात होनी है
कभी वो कुछ गिरा देगा कभी सूखा ही गुज़र जायेगा
मेरे हाथ न फ़ैलाने पे कभी घनघोर बारिश भी करा देगा
मेरे दिल को जगाने को कभी बस बिजली खड़का देगा
मेरे उठ खड़े होने पे जोरों से हंस वो देगा
और मैं रहूँगा खड़ा पकड़े खिड़की की अपने सलाखें
ज़बरन सी हंसी लेके अपनी उसे देखा करूँगा
उसके मज़ाक पर मैं कोई न गुस्सा करूँगा
उसको जाते देख मैं पीछा न करूँगा
वो तमाम सवाल भी करे तो भी मैं ज्यादा कुछ न कहूँगा
वो जो रह जाती है उसके पीछे में उसके साथ रहूँगा
बैठ कर खिड़की पे हवा मन्ह्सूस करूँगा
उड़ती है दूर आसमान के कोने पे जो चिड़िया
बनती हैं जो उसके कतरनों पे डिजाइनें
उभरती हैं जो उसके साफ़ फैले पट पे चित्रकरियाँ
मैं उन्हें देखूंगा, पहचानूँगा, नाम दूंगा उनको
वो मेरे लिए हैं आती, एक अंजाम दूंगा उनको
मेरे जैसे और हैं जो रहते खामोश से खाली
उन्हें साथ जोडूंगा और काम दूंगा उनको
और जब थक के गिर जाऊंगा
जब सब कुछ करके फिर ऊब जाऊंगा
औरों के बीच बैठ कभी फिर से तनहा हो जाऊंगा
कुछ न कहूँगा, मैं कुछ न करूँगा
खामोश आकर फिर से अपनी झोपड़ी में
मैं लेट जाऊंगा, मैं सो जाऊंगा
सब एक लम्हा है और मैं उस लम्हे का होकर रह जाऊंगा

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