बस थोड़ा सा रहता है …

जल चुका है सब ब सब
बस थोड़ा सा रहता है
पस्त हैं सब हौसले
बस थोड़ा सा रहता है
चल चुका है तू बहुत
बस थोड़ा सा रहता है
पार लिए बड़े फासले
बस थोड़ा सा रहता है
मत तोड़ तू खुद को
अब मत छोड़ तू खुद को
जाने कौन है जो हर घड़ी
ये कहता ही रहता है
चल चुका है तू बहुत
बस थोड़ा सा रहता है
कह चुका हूँ मैं बहुत
बस थोड़ा सा रहता है
इसी थोड़े थोड़े में देखो
कितना कुछ है सिमट आया
धरती नाप चुकी है
और गगन भी है भर आया
सब कुछ सिमट चुका है बस
थोड़ा सा रहता है
चल ले जरा कुछ और दूर
बस थोड़ा सा रहता है
जाने कौन है जो हर घड़ी
ये कहता ही रहता है
उस पार जब कुछ भी नहीं
जाना तुझे कहीं है ही नहीं
फिर भी तू बस ये सोच
चलता ही रहता है
मिल जाये शायद कोई नायाब नूर
की यूँ ही आ गया हूँ बहुत दूर
पर अब भी नहीं हूँ सीख पाया
की खुद से न कहूँ ये हर घड़ी
की चल चुका है तू बहुत
बस थोड़ा ही रहता है
जाने कौन है जो हर घड़ी
ये कहता ही रहता है
बस थोड़ा ही रहता है

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