लेकर फलों का टोकरा मुझसे मिलने आई ज़िन्दगी
अपने बगीचे के बहुत से फल फूल लाई ज़िन्दगी
मैंने बटोर कर रखे थे चंद पत्थर जेब में
उनको दिखा के बोला इनसे खेलते हैं
रख फलों को नीचे चौसर ले आई ज़िन्दगी
मैंने कहा इसको छोड़ो कुछ नायाब खेलते हैं
सबसे पहले खेलने के सब नियम तोड़ते हैं
उछाल दिए पत्थर मैंने बोला इनको पकड़ते हैं
जो नीचे गिरेंगे उनको पैरों से बटोरते हैं
ज़िन्दगी को खेल मेरा कुछ पसन्द नहीं आया
घूर के देखा उसने कुछ देर फिर यूँ ही चली गयी
जाते जाते फल और चौसर भी ले गयी
अब बैठ खाली हाथ मैं पत्थर उछालता हूँ
दौड़ता हूँ इधर उधर उनको पकड़ता हूँ
हार जाता हूँ तो कुछ देर उदास होता हूँ
जीत कर कुछ देर अनायास रोता हूँ
हर खेल में जैसे खुद को मैं खोता हूँ

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दिमाग ख़राब हो चला है दोस्तों
एक इन्किलाब हो चला है दोस्तों
हुक्म मेरा इसपे पहले भी न चलता था
अब ये बगावत पे उतर आया है दोस्तों
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किस किस की व्यथा पे आंसू बहाऊँ मैं
या कहानी सिर्फ अपनी ही सुनाऊँ मैं
कौन हूँ कहाँ से आया हूँ ये कहूँ तुमसे
या आज क्यूँ मिलने आया हूँ ये बताऊँ मैं

उलझा हूँ जिन धागों में वो थमा के तुम्हें
बातों में उलझा तुम्हें खुद को सुलझाऊं मैं
या ये जो खुल के निखर आया है आसमाँ
याद आती है जो कहानी वो सुनाऊँ में
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औकात मेरी ज़िन्दगी ने आज बताई है मुझे
जो सुन न सका कभी वोही बात सुनाई है मुझे
घोंट कर गला मेरा बंद कर दिया डब्बे में?
मेरी नहीं अपनी जात दिखाई है मुझे
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मैं फिर तेरी राहों में आ गया हूँ ज़िन्दगी
हो तनहा तेरी पनाहों में आ गया हूँ ज़िन्दगी
मुझको मालूम है इस बार तू हाथ थाम लेगी
ठोकरों से तेरे काबिल हो गया हूँ मैं ज़िन्दगी
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कुछ है जो मरा नहीं है अभी
दिल में है कहा नहीं है अभी
कह दूंगा जरा सबर तो करो
घायल है भरा नहीं है अभी
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मंजिलें किसको हासिल होती हैं
हाँ मुकाम मिल जाते हैं
सफ़र नहीं ख़त्म होता है
कुछ देर को थकान मिट जाती है
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कैसी जगह आकर खड़ा हो गया हूँ मैं
मिल गया हूँ कि गुमराह हो गया हूँ मैं
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दड़बे से निकल रहा हूँ अभी
उड़ना है फुदक रहा हूँ अभी
जाना है पहाड़ी के उस पार
जाऊंगा कह रहा हूँ अभी
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मेरी कोई राह नहीं
मैं चलता रहता हूँ
किसी मंजिल नहीं जाना
कहीं हर दिन पहुंचता हूँ
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