शहरों में अमन चाहिए तो सीमाओं पे क़त्ल करने होंगे
शास्त्रों ने कहा कि राम तुझे हथयार चुनने होंगे
कृष्ण देवता बनें सो गांधारी पुत्र मरने होंगे
द्रौपदी रंडी हुयी सो वस्त्र तो हरने होंगे

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लोगों के साथ होता हूँ
तो खँडहर लगे है तू
अकेले जब चलता हूँ
शहर सा लगे है तू
मेरे हालात, हरकत औ अंजाम से
बेखबर लगे है तू
तू चीज़ क्या है दिल मेरे
नया सा हर पहर लगे है तू

शहर में तेरे झोंके है ठंडी हवा के
थपेड़े हैं गरम फिजा के
अरमान हैं जाने कितने इब्तेदा के
और मौसम कुछ याद वाले
बाकी हैं उस आखिरी विदा के

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