सब बड़े, मैं छोटा…

बन गए हैं सब बड़े, मैं छोटा रह गया
हो गया सबका काम, मेरा होता रह गया
लोगों ने दांत मांज लिए, नहा लिए खा लिए
वो ऑफिस चले गए, मैं गांड धोता रह गया

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such a sleepless night it is
such a hopeless night it is
why to get up, where to go
such a pointless life it is

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कितना भटका रहा हूँ मैं
कितना सहमा रहा हूँ मैं
झूठ को दुनिया के सच मानके
सच में खुद के कितना दुबका रहा हूँ मैं
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हज़ारों चिराग मेरे पीछे हैं हज़ारों मेरे आगे होंगे
बुझ के फिर जलने को क्या वो भी युहीं जलते होंगे?
अपने लिए अब हम, जी के क्या करेंगे
होश यूँ ही जब गुम हैं, शराब पी के क्या करेंगे
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