Archive for September, 2011

September 21, 2011

एक याद …

तुम एक याद हो
अब नहीं ख़ास हो
न धुंधली हो, न परछाई हो
बस, इक, कोरी सच्चाई हो

अब तुम्हें याद नहीं करता
आँखें बंद करके बात नहीं करता
कुछ भी खो जाने पर अब
तुमको पा जाने की आस नहीं करता

जानता तो यूँ सब कुछ पहले से ही था
बस अब मैं कोई सवाल नहीं करता
औरों से तेरा जिक्र कभी यूँ भी नहीं किया
अब खुद में भी अहसास नहीं करता

तेरे होने से भी शायद यही हश्र होता मेरा
लेकिन मैं ये सारे हिसाब नहीं रखता
लिखता तो शायद तब भी मैं कुछ न कुछ
लिख के बस यूँ उदास नहीं होता