Archive for February 6th, 2011

February 6, 2011

दिया हूँ…

सब मिल गया तो रोऊँगा कैसे
रोऊँगा नहीं तो होऊंगा कैसे
होऊंगा नहीं तो पाऊँगा कैसे
पाया नहीं तो खोऊंगा कैसे

मिलते मिलते रह जाने में
सब पाकर कुछ रह जाने में
अजीब कसक है जाने कैसी
पूरा हूँ अधूरा रह जाने में

जगमग रोशनी देख जला हूँ
दिया हूँ, अँधेरा देख जिया हूँ
जलते जलते जान लिया है
कुछ भी नहीं है बुझ जाने में