Archive for November 18th, 2010

November 18, 2010

ये जिंदगी है मस्का…

ऐ जाने वाले कहाँ जायेगा
दूर तक यूहीं दौड़ लगाएगा
मेरी बात जो नहीं मानेगा
मुफ्त मुसीबत सर लायेगा

आजा थोड़ी चिलम पीते हैं
ठस करते हैं, बकर करते हैं
इज्ज़त, दुनिया की उतारें
अपनी तहस – नहस करते हैं

मुफ्तखोरी की लत लगा
और हरामखोरी का चस्का
दुनिया सारी चूतिया है
जिंदगी यही है मस्का
भैये, ये जिंदगी है मस्का

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